Wednesday, October 8, 2008

आखिर कब तक

अभी हाल ही में समाचार चैनल देख रहा था ! उसमे दिल्ली धमाको में पीड़ित लोगो के बारे में बता रहे थे उसमे एक सिमरन नाम की बच्ची (जो की ३ साल की है ) के बारे में बता रहे थे की किस तरह से उसने अपने पिता , दादा और बुआ को खो दिया और उसकी माँ ख़ुद घायल अवस्था में अस्पताल में पड़ी है !
ये पूरा परिवार एक बड़े पेड़ के नीचे रहता है तथा वहां उनकी चोटी सी दुकान थी जहा बम धमाका हुआ था !
इस घटना के बाद तो उस बच्ची की हँसी तो कही गयाब हो गई है ! जैसे जिस तरह से पहले हँसा करती थी आतंकियो ने उसके परिवार से भी दुश्मनी निकाली , जबकि उसका तो दूर दूर तक कोई ताल्लुक नही था !
जिन्दगी में कभी कभी ऐसे पल आते है जब सब अचानक ख़त्म हो जाता है , सब कुछ एक साथ ! तब उस समय क्या करना चाहिए खासतौर से जब शुन्य से शुरुआत करनी हो जिस तरह से चिडिया अपना घोसला एक एक तिनका जोड़कर बनाती है ! वैसे ही शायद इंसान शुरू करता होगा !
दोस्तों आतंक अब भारत के लिए नासूर बनता जा रहा है ! ये ऐसी समस्या है जो की ऐड्स की बीमारी से भयंकर है ! और इसका इलाज उससे पहले ढूँढना पड़ेगा !
इस समय पुरा भारत समस्यों से ग्रस्त होता जा रहा है पहले कोशी नदी में आई बाड़ जिससे बिहार परेशान था ३२ लाख लोगो को अपने घरो से दूर जाना पड़ा उसके बाद पाकिस्तानी फौज द्वारा नियंत्रण रेखा का उल्लघन और घुसपैठ की कोशिश उसके बाद कर्नाटक और उड़ीसा में जारी ईसाई विरोधी दंगे और लगातार हर शहर में फट रहे बम , पुरा मुल्क इस समय दहशत में जी रहा है !
मैं उम्मीद करता हूँ की आगे आने वाले सालों में अगर अपने पुराने लेखो को पढूं तो कम से कम यही सोचू की आज कितनी शान्ति और स्म्रध्दि है .... आमीन

2 comments:

Unknown said...

what u have written is absolutely correct.ek ke baad ek hadse hote jaa rahe hain log pahle wale bhula nahi pate tab tak naya kuch ho jata hai.
itne mental strauma mai kaise jiyega insaan.

Brijesh Choudhary said...

my frend. terrorists have no relation with any single indian. they just know how to harm. they don't see whome to harm.
in every blast many people die but look the blast at parliament, "sala koi nahi mara, koi marta to desh ka jara bhala hota".

इस भीड़ मे आजकल कौन सुनता है !

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